Feb 14, 2019
खुद की तलाश | Khud Ki Talash | Poetry | Poem |
जी रहा था ....
हर किसी के मुस्कुराहट के लिए ,
इस चाह ने कब खुद से बेगाना कर दिया .......
हमें खुद पता भी न चला ,
चाहा जो हर किसी का ख्याल रखना .....
खुद का ख्याल रखना कब भूल आये ..
पता भी न चला ,
अच्छी जिंदगी थी मेरी वही पर ....
जब जी रहा था खुद की जीत के लिए ,
खुद की ख़ुशी के लिए ,
खुद की भलाई के लिए ,
खुद की जरुरत के लिए ,
आओ लौट चले , मेरे मन !
फिर से अपनी दुनिया में ,
जीना है अब हमें .......
खुद की जीत के लिए !
खुद के सपनो के लिए !
मेरे आने वाले अपनों के लिए !
बस अब और नहीं .....
कि जरुरत बनू , किसी और की जरुरत के लिए
बस जीना भूल गया था ,
तुझे ऐ जिंदगी .....
बुरा ना मान जिंदगी !
राही लौट आया है फिर से ,
अपनी मंजिल की ओर
तेरी जीत के लिए
छोड़ आया वो रास्ता ,
जिसमे थी खुशियाँ हर किसी के लिए
अब जीत भी तेरी होगी ,
और उसमे खुश होने वाले भी तेरे अपने होंगे
न कोई दुश्मन होगा ,
न कोई मक्कार -फरेबी होगा
जो होगा बस आगे बढ़ने और बढाने वाला होगा
बस अब जीना है ,
खुद के सपनो के लिए
बस जीना है ...
जी भर के अपने और आने वाले अपनों के लिए
- आकाश आर्यावर्त