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Mar 21, 2019

| तलाश | Talash | Poetry | Poem |

मरकर -मिटकर  पाया अपने अस्तित्व को  , अब फिर से  मिटने का शौक नही 


अपने ही शर्तो पर रचा स्वयं ,किसी से मिटने का खौफ नहीं 


हालातो की भट्टी में बना फौलाद हूँ  ,ज़माने के  हालातों से टूटने का कोई डर नहीं 


स्वयं के वजूद को मरकर जिन्दा होते देखा है ,किसी के साथ की परवाह अब और नहीं 


खुद पर भरोसे से जंग जीती है मौत से भी ,किसी  को खोने की व्यर्थ चिंता अब और नहीं  




                                                                        - आकाश आर्यावर्त