Nov 9, 2020
कुछ ऐसे हमने अपना जन्मदिवस मनाया है
बचपन से ही गाय - बछड़ों संग खेले ,
उन्ही के साथ हमने दौड़ लगाया है ,
बागों में साथ घुमे तो कभी पूरा गाँव घुमाया है ,
अपनी गैया से हमने स्वयं को कब अलग पाया है ,
अपने घर पर पकवान हमेशा पहले अपनी गैया को ही खिलाया है ,
जन्मदिवस तो क्या हर पर्व उन्ही के साथ मनाया है |
अपने हर जन्मदिवस पर
ब्रह्ममुहूर्त के स्नान उपरांत सदैव देव चरणों में शीश नवाया है ,
देव के चरणों में स्वयं के आत्मा को आलोकित करने हेतु दीप जलाया है ,
देव दर्शन के बाद गौ माता के चरणों में ही शीश नवाया है ,
कर गौ माता को चरण सपर्श उन्हें गले से भी लगाया है ,
कर प्रथम प्रसाद अर्पित गौ को फिर पंछियों को भोग लगाया है ,
आज सौभाग्य से श्वान देव भी पधारे तो उन्होंने ने भी अपना भोग पाया है ,
कर पंचभूत अर्पण फिर माते को भी शीश नवाया है
मध्यान्ह में ब्रह्माण्ड को साधने हेतु मौनपूर्वक ध्यान लगाया है ,
ब्रह्माण्ड के सानिध्य में आत्मा ने परमानंद और ज्ञान पाया है ,
संध्याकाळ में हमारी गैया ने अपने माथे से हमारे माथे को मिलाया है ,
अपने बच्चे की तरह चाटकर अपना स्नेह दिखाया है ,
अब दूध से बनी खीर और पूरी का नंबर आया है ,
इस बार खीर हमारी माते ने अपने हाथों से बनाया है ,
जन्मदिवस को हमने अपने हमेशा से कुछ इस तरह से मनाया है ,
कभी हमारी माते ने तो कभी हमने पनीर - पुरी - खीर का पकवान बनाया है
- आकाश आर्यावर्त
