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Jan 9, 2021

आत्म स्पन्दन ध्यान ( Atm - Spndan Meditation )

ध्यान की अनेक विधाएं हैं |

कुछ ध्यान में आत्म उत्थान किया जाता है , 
कुछ ध्यान में प्रकृति से सामंजस्य स्थापित किया जाता है |

प्रकृति अर्थात ब्रह्माण्ड 

इस विधा को सम्पन्न करने के लिए साधक के मन का निश्छल - पवित्र - स्नेह युक्त होना चाहिए | इस विधा के सम्पन्न हो जाने पर समस्त प्रकृति अपना अनंत प्रेम व् स्नेह आपमें समाहित कर देती है | आपका जीवन प्रेम व् उल्लास से पूर्ण हो जाता | मन में अगाध शांति व् विचारों में अचल स्थिरता रहती है | 





आत्म स्पन्दन ध्यान के समय प्रकृति के समस्त जीव आपके तरफ आकर्षित होने लगते हैं | वही इस ध्यान के सिद्ध हो जाने पर साधक किसी जीव के साथ प्रेम पूर्वक रह सकता | फिर भले ही वह कितना भी हिंसक क्यों न हो | हमारे शास्त्रों में ऐसे कई ऋषियों - मुनियों का वर्णन है जिनकी कुटिया में सभी जीव - जंतु साथ रहते थे |



                       
                          ( A Video Recorded Before Starting Atm - Spandan Meditation )

  


यह ध्यान स्वयं में एक सम्पूर्ण विज्ञान है |

इस ध्यान में साधक की आत्मा का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के अनंत अस्तित्व से जुड़ जाता है | साधक अनंत प्रेम में डूब जाता है |


किन्तु इस अनंत - अचल - अविनाशी  प्रकृति  प्रेम  के प्राप्ति हेतु साधक को मानसिक - शारीरिक - वाचनिक - आत्मिक  सिद्धांतों - नियमों व् मर्यादाओं का पालन अपरिहार्य है | एक बार यह प्रेम योग भंग हो जाने पर इसका पुनरुत्थान असंभव सा है |

( यही प्रकृति प्रेम सिद्धांत हमारे जीवन प्रेम का मार्गदर्शक है )



प्रकृति ही है प्रेयसी !

प्रकृति ही  है मार्गदर्शक !

प्रकृति ही है सहायक !

प्रकृति ही है पूरक !

प्रकृति ही है शाश्वत !



- आकाश आर्यावर्त