May 24, 2021
The Unanswered Question
हर दिन की तरह आज भी ध्यान करने बैठा तो हर दिन की तरह गिलहरी आई....
पर आज वो अकेली थी ,
ना पास आई....
न वो ख़ुशी थी....
ना उसके आँखों में वो चहक...
जो उसमे हर दिन होती थी !
बस थोड़ी दुरी पर बैठकर देखती रही......आँखों में आंसू लिए और जाने कितने सवाल लिए
थोडा दाना खाया पानी पिया और चली गयी
लेकिन पास नहीं आई !
चिड़ियों की चहचहाहट कल दोपहर से ही ज्यादा थी
वो आज भी आस - पास थी लेकिन वो चहचहाहट कई प्रश्नों के साथ - मन में पीड़ा लिए हुए थी
पहली बार ध्यान के समय किसी पंछी ने चोंच मारी सर पर....वैसे तो ऐसा अक्सर होता है लेकीन आज की चोट में गुस्सा था
वो प्यार नहीं !
सर में हल्का घाव हो गया
माते ने कहा आज बहोत सारी चिड़ियाँ आई है और आवाज कितना अच्छा लग रहा है
हमने कुछ नहीं बोला क्यूंकि उस आवाज के दर्द को मैंने महसूस किया था......वह उनकी चहचहाहट नहीं उनका दर्द था जो की कोई मानव नहीं समझ रहा था क्यूंकि निज स्वार्थ के आगे कोई कहाँ किसी का दर्द समझ पाता है
कल चार पेड़ो को काट दिया गया......सिर्फ इसलिए की उससे पत्ते गिरते थे उनके घरों पर
तो उन्होंने उनके घरों को गिरा दिया.....जो अपना दर्द - आंसू किसी को न तो दिखा सकते हैं न समझा सकते है ना बता सकते हैं
तो उन्होंने उसे काटकर अपना घर बचा लिया......पांचवे पेड़ को भी काटने वाले थे
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जब मना करने के लिए जा रहा था तो माते ने रोका की उनकी जमीन है तुमसे क्या मतलब है !
वापस जाकर बैठा लेकिन चिड़ियों की आवाज से बैठा न गया
मैंने सीधे जाकर से गुस्से में बोला.....कैसा लगेगा अगर भगवन तुम्हारा सारा घर-बच्चे तुमसे एकाएक छीन ले !
बिना किसी गलती के !
इतना बोलकर मै चला आया
उसके बाद लोगो ने आखिरी पांचवे पेड़ को नहीं काटा | वह पेड़ तो बचा रह गया लेकिन वो सब जो घर उजाड़ हो गए उनको न बचा सका
मैंने बोला की वो अपने भोजन के लिए आया है न की तुम्हे या किसी को काटने तो मैं उसे भगाउंगा न की मरूँगा और अगर मारना भी पडा तो वो आखिरी विकल्प होगा न की पहला
इस घटना के कुछ दिन बाद ही पेड़ से होकर एक बिना जहर वाला साँप ( धामिन ) पडोसी के छत पर चढ़ गया और मेरी माते ने देख लिया तो हल्ला मचा दिया
शोर सुनकर जब मै ऊपर पंहुचा तो देखा की लोग उसको मारने की तैयारी कर लिए थे
मैंने अपनी छत से लोगों को डाटा की एक तो वो जहरीला नहीं है और ऊपर से उसने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं है ......तो क्यों मरने के लिए पागल हुए जा रहे हो
वो खुद चला जायेगा.....कुछ समय बाद वो चला भी गया
लोग अपने घरों को लौट गए !
लेकिन शाम जब छत पर गया तो देखा की उन लोगों ने वो पेड़ काट दिया था जिससे वो ऊपर चढ़ा था |
हर दिन की तरह उस दिन अपनी हरी चाय पीते हुए ये सोच रहा था की मैंने क्या ठीक किया ?
एक निरीह - निरपराधी जीवन तो बचा लिया लेकीन लेकिन एक जीवन भी ले लिया !
वो जीवन जो जाने कितनो को नव जीवन देता ?
क्या मै उसे बचा सकता था !
फिर चाय से ध्यान अपने खो चुके प्रेमिका की यादों में चला गया.......वह चाय का वादा जो कभी पूरा न हो सका
जो दुनिया में एक बदलाव ला सकती थी !
जो जाने कितनो को नव जीवन दे सकती थी ?
क्या मै उसे बचा सकता था...............!
( Don't Know it's Good thing or Bad Thing
The Question which will never be answered )



