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Aug 27, 2020

निःस्वार्थ पवित्र प्रेम भाव

प्रेम  किसी को करना लेकिन ,

कह कर  उसे बताना क्या !

स्वयं  को कर देना अर्पण ,

किन्तु और को अपनाना क्या !


गुण का ग्राहक बनना किन्तु ,

गा कर उसे सुनना क्या !

मन के कल्पित पवित्र भावों से 

औरो को भ्रम में लाना क्या !


ले लेना सुगंध प्रेम -सुमन की ,

तोड़ उन्हें मुरझाना क्या !

प्रेम से सर्वस्व करना समर्पित ,

किन्तु प्रेम पाश फैलाना क्या !


त्याग अंक से पोषित यह  प्रेम ह्रदय ,

अब उसमे स्वार्थ बताना क्या !

दे कर ह्रदय , ह्रदय पाने की 

आशा व्यर्थ लगाना क्या !

   

           -आकाश आर्यावर्त 


Aug 17, 2020

अनंत प्रकृति व् अनंत संभावना

यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड प्रकृति के नियमो के अधीन है | यदि आप अपने व्यक्तित्व व  विचारों के अनुनाद को किसी विशेष आयाम में ले जाकर जोड़ दे तो प्रकृति आपको हर वह साधन -प्रतिभा -योग्यता -महत्वकांक्षा -व्यक्तित्व आपको देगी जिसकी आपको आकांक्षा है | हमारी संस्कृति में इस विधा को योग कहा गया है | योग के हर आसान में यदि आप उस आसान से निहित चक्र पर ध्यान का अभ्यास तय समय तक करें तो अनंत ब्रह्मांडीय शक्तियों का जागरण संभव है जो सामान्य मानव के परिकल्पना से भी परे है |


Kundalini Yoga

तदोपरांत प्रकृति आपको हर वह गुण -सामर्थ्य -प्रतिभा -साधन -व्यक्तित्व -महत्वकांक्षा  सुलभ कराती है जिसके लिए आप स्वयं को निःस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते है | चाहे वह साधन -प्रतिभा -योग्यता -महत्वकांक्षा कितना भी उच्च क्यों न हो | प्रकृति षडयंत्र करती है आपको आपके ध्येय तक पहुचने के लिए और अनुकूल वातावरण -परिवेश तैयार करती है जो की कभी - कभी अत्यन्तं कष्टकारक भी होता है | क्योंकि अग्निपरीक्षा के आभाव में किसी भी प्रतिभा का परिष्करण नहीं होता |


अतः साधक को खुले ह्रदय से अग्निपरीक्षाओ का जीवन में स्वागत करना चाहिए और प्रकृति पर अटूट व् दृढ विश्वाश के साथ धैर्यपूर्वक अग्निपरीक्षा को सम्पन्न करना चाहिए |


ठीक इसके विपरीत यदि आप उस साधन -प्रतिभा -योग्यता -महत्वकांक्षा -व्यक्तित्व को आपसे वापस ले लेती है यदि उसका समुचित सम्मान -प्रयोग व् उसके प्रति समर्पित भाव नहीं रखते |


यदि वह साधन -प्रतिभा -योग्यता -महत्वकांक्षा -व्यक्तित्व  उच्च हो तो उसे कदापि भी किसी अन्य विकल्प से प्रतिस्थापित ना करे अन्यथा प्रकृति इस अपमान के प्रतिउत्तर में वह गुण-साधन -प्रतिभा -योग्यता -महत्वकांक्षा -व्यक्तित्व आपसे वापस ले लेगी |

                                                                                                                         -आकाश आर्यावर्त