Followers

Aug 27, 2020

निःस्वार्थ पवित्र प्रेम भाव

प्रेम  किसी को करना लेकिन ,

कह कर  उसे बताना क्या !

स्वयं  को कर देना अर्पण ,

किन्तु और को अपनाना क्या !


गुण का ग्राहक बनना किन्तु ,

गा कर उसे सुनना क्या !

मन के कल्पित पवित्र भावों से 

औरो को भ्रम में लाना क्या !


ले लेना सुगंध प्रेम -सुमन की ,

तोड़ उन्हें मुरझाना क्या !

प्रेम से सर्वस्व करना समर्पित ,

किन्तु प्रेम पाश फैलाना क्या !


त्याग अंक से पोषित यह  प्रेम ह्रदय ,

अब उसमे स्वार्थ बताना क्या !

दे कर ह्रदय , ह्रदय पाने की 

आशा व्यर्थ लगाना क्या !

   

           -आकाश आर्यावर्त