Nov 29, 2020
बचपन (Childhood Memories )
बचपन अपना किसे प्यारा नहीं लगता !
वो बचपन ही है जब हमारे संस्कार हमारे जीवन का आधार बनते हैं ...
वो बचपन ही है जब हमारे नैतिकता का अंकुर अपना रूप लेता है ...
वो बचपन ही है जब हमारे मूल्य और आदर्श हमारे जीवन की गहराई में उतरते हैं ...
हमारे बचपन की पहली पुस्तक " बालकों की बातें " थी जो गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित थी ....यह पुस्तक हमारे पास अभी भी सुरक्षित है क्यूंकि यही हमारे जीवन का आधार है और प्रथम मार्गदर्शक है |
यह पुस्तक हमने ४ या ५ वर्ष की अवस्था में पढ़ी थी
इसके अलावा अन्य पुस्तके थी जो हमें हमारे मामा जी से हमारे माते को मिली थी और फिर हमें ....उस पुस्तक की कुछ कहानियां और जीवनियाँ हमें आज भी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं ...
उनमें से कुछ एक इस प्रकार हैं
इस जीवनी से हमें आत्म संयम और मनोविकारों पर सदैव विजय पाई है और कदापि भी अपने आप को धर्म पथ से वासना पथ पर जाने नहीं दिया ....और यह भी हमने शायद ५ वर्ष में ही पढ़ा था और उसके बाद बारम्बार
उसी पुस्तक की एक और कथा है जो तन की नश्वरता का ज्ञान देती है और इस कथा ने हमें सदैव तन प्रेम और इसकी माया से बचाए रखा है
वैसे तो बहोत सारी जीवनियाँ हैं लेकिन अब सभी को तो नहीं दिखा या बता सकते न
लोगों में हमारा मन तो लगता नहीं था ...या तो पुस्तकों में खोया रहता या आसमान के अनंत रहस्य में
हाँ बचपन में जब हम पांचवी या शायद छठी कक्षा में थे तो हमने अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करने के लिए एक पुस्तिका तैयार की थी जो अभी भी हमें मार्गदर्शित करती रहती है ....हालाँकि अब चीजे जायदा उन्नत हो चुकी हैं किन्तु प्रथम आधार तो यही हैं न
वैसे तो ज्यादातर हमारी पुस्तके और वस्तुएं हमारे घर वालों ने बेच दी रद्दी वालों को लेकिन हमें ये सब इतनी प्यारी हैं की हम इन्हें अपने बक्से में रखते हैं ...हालाँकि फिर भी कुछ चीजे तो बिक ही जाती हैं जो उन्हें ख़राब समझ आती हैं क्यूंकि हमारे लिए हमारी कोई भी वास्तु सदैव महत्वपूर्ण है |
शायद हम जब ७ - ८ वर्ष के थे तभी से हम घर आने वाले अख़बार से अपने पसंद वाला हिस्सा काटकर रख लिया करते थे जिसके लिए हम अक्सर कूटे जाया करते थे मतलब पिट जाया करते थे और यही कांड हम दुसरे लोगों से किताब मांग कर पढने के दौरान किया करते थे
सच सच बताएं तो हमारी आदते और पसंद ही ऐसी थी की हमें औरों से अलग रहने लगे और अब भी रहते हैं
और ये थी हमारी पहली दिनचर्या जो हमने बनायीं थी और वो I LOVE YOU वाली घडी हमने घर वालों से जिद्द करके खरीदवाई थी .....और हाँ बाकी पुस्तक को तो चुरायी थी हमने
बचपन प्यारा होता है और उसकी यादें उससे भी प्यारी होती हैं ....
- आकाश आर्यावर्त












