Followers

Dec 9, 2020

तन प्रेमी या शास्वत अनंत प्रेमी.....एक प्रश्न | कविता | ( Body Love or Soul Love )

उसने  तन को था चूमा उसके  ,

किन्तु  उसके निश्छल  मन को  छू न सका 


लिए ह्रदय में वासना की पिपासा  ,

वह उसके  आत्मा की अप्रितम सुन्दरता में  डूब न सका 


sad love , love




देह प्रेम  में होकर वशीभूत वह अज्ञानी  ,

उसके अनमोल  जीवन स्वप्न को बुझ न सका 


स्वार्थ तृप्ति से पराभूत वह निरीह ,

उसके सर्व समर्पण से स्नेहित  सत्य  भाव को देख न सका 


क्षणिक तृप्ति की  भावना से लिप्त वह प्रेम  , 

उसके जीवन पूर्णता के इच्छा  को समझ न सका 


क्या कहूँ उस प्रेम को .....?

तन प्रेम या शाश्वत अनंत प्रेम  !





 वर्तमान कालखंड में देह प्रेम की रीत सी चल पड़ी है .....

 देह ही सजाते - देह ही सवारते - देह ही दिखाते - देह से ही प्रेम करते 

आत्मा को जैसे विस्मृत किया जा चूका हो......प्रेम भाव नहीं रहा ....अब .....देह प्रेम भाव मात्र शेष रह गया है !

 


ऐसा लगता है मानों वह सर्वथा विशुद्ध प्रेम  विलुप्त ही  हो गए हों  !

वह निःस्वार्थ  समर्पण नहीं रहा !

वह प्रेम  में पवित्रता नहीं रही ! 

वह आत्माओं का समन्वय भाव नहीं रहा !

वह जीवन सामंजस्य व् उत्थान भाव न रहा !

वह वचन दृढ़ता न रही !

वह व्यक्तित्व में सत्यता न रही !

.............................न वह आदर्श प्रेम शेष  रहा !





दुर्लभ है वह किन्तु विलुप्त नहीं !

गुप्त है वह किन्तु सुषुप्त नहीं !

गुप्त है वह तुममे ही  कहीं .....

दुर्लभ है वह तुमसे ही कहीं ..... 


- आकाश आर्यावर्त