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Oct 16, 2020

मेरे टूटे और हुए सपने - महत्वकांक्षाएं

 मेरे टूटे हुए सपने  हैं 

और कुछ टूटे हुए महत्वकांक्षाएं  भी .....


पर ये सपने  - महत्वकांक्षाएं  किसी प्रेमिका  या व्यक्ति प्रेम या परिवार  के लिए नहीं थे - ना हैं - ना कभी होंगे 

मेरे सपने  थे नोबेल प्राइज पाने के सबसे कम उम्र में पुरे विश्व में 

मेरे सपने  थे अपने अधूरे और  खो चुके साइंस प्रोजेक्ट के पेटेंट और उसके बिज़नेस से पूरी दुनियां पर राज करने के 

मेरे सपने  थे IISC  बेंगलुरु में अपना प्रवेश KVPY से पाने का 

मेरे सपने  थे पुरे भारत में 25 वर्ष के उम्र से पहले गुरुकुल शिक्षा तंत्र की  स्थापना के  

( ये वो सपने हैं जो  टूटे चुके हैं ....ना सारे सपने .....ना पुरे हुए सपने .....ना पूरा विवरण ) 

मेरे सपने ही मेरे सच्चे प्रेम थे - हैं  और रहेंगे 

किन्तु उस आकस्मिक दुर्घटना या षडयंत्र या चक्रव्यूह ने मेरे कुछ जान से भी प्यारे  सपनों को तोड़ दिया .......याद है अभी भी हमें 


जब हमारा अपना शरीर भी हमारा साथ नहीं दे पा रहा था 

हमारा अपना मष्तिष्क भी हमारे अंतरात्मा के आदेश का पालन नहीं कर पा रहा था 

 हमारे अपने भी हमारा साथ नहीं दे रहे थे 

हमारे अपने आशु भी साथ छोड़ चुके थे 



हम नर्क के उस रास्ते से भी चले हैं ......


जब औसत लोगों ने हमें पागल कहा ,

मेरे अपनों ने हमारा  उपहास उड़ाया ,

मेरे अपनों ने लोगों के सामने हमें अपमानित किया ,

मेरे अपने शरीर ने भी हमारा साथ नहीं दिया ,



किन्तु धन्य है यह अनंत ब्रह्माण्ड-प्रकृति  जिसने हमारा साथ कभी नहीं छोड़ा |

जब भी मैंने भीगी आँखों से  - टूटे हुए मन से भी ध्यान - साधना की तब-तब मुझे इसका अनंत प्रेम - स्नेह और साथ  मिला 


जब - जब भी डाक्टर ने भी उपचार में अस्मर्थ्य दिखया तब तुमने कुण्डलिनी योग से मेरा उपचार किया 


जब - जब मैं पथभ्रमित हुआ तब - तब तुमने मुझे भिन्न श्रोतों से  दिशानिर्देश दिया 


पूर्ण विश्वाश है हमें तुम पर ऐ ब्रह्माण्ड !


तुमने हमें  जो हमारे इच्छानुसार नहीं दिए वह भी हमारे लिए तुम्हारा आशीर्वाद है 

तुमने हमें जो आघात और कष्ट दिए वह भी हमारे लिए तुम्हारा प्रसाद है 

अंतरात्मा का अनुसरण ही तुम्हारा आदेश है ........और तुम्हारा आदेश का अनुसरण ही हमारा ध्येय - ध्यान और जीवन 


- आकाश आर्यावर्त