Oct 22, 2020
राम या रावण
राम भी स्त्री मर्यादा के लिए युद्ध किये
रावण ने भी स्त्री मर्यादा के लिए युद्ध किये
एक को सम्मान मिला , इतिहास में मान मिला
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से मानवता को एक महान आयाम मिला
मर्यादाहीन - अहंकारी - वसनालिप्त रावण को , मर्यादापुरुषोत्तम राम से ही जीवन को विराम मिला
क्या आपने कभी विचार किया की जब दोनों ही वीर - ज्ञानी थे .....
दोनों ही स्त्री मान की रक्षा के लिए युद्ध किये ......
तो एक को सम्मान और एक को अपमान क्यूँ ?
तो एक को भगवान् एक को शैतान क्यूँ ?
इसका उत्तर भी स्त्री चरित्र के दर्शन में ही प्राप्त होगा.........आइये समझते हैं
मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्री राम ने माता सीता के लिए युद्ध किया वही रावण ने सूपर्णखा के लिए
माता सीता संयमित व् सतीत्व धर्म का पालन करने वाली थी .......वही सूपर्णखा व्यभिचारी - वासना लिप्त थी
माता सीता संयम - तप की प्रतिमूर्ति थी .......वही सूपर्णखा असंयमित - पापिनी थी
माता सीता का भोजन सात्विक - शुद्ध था ........वही सूपर्णखा का भोजन राक्षसी - अशुद्ध था
माता सीता का जीवन उद्देश्य धर्म - मानवता की स्थापना था ........वही सूपर्णखा का जीवन उद्देश्य भोग - विलास था
माता सीता की सत्यता स्वयं प्रक्रति थी ...........वही सूपर्णखा अपने भाई से भी असत्य बोलकर मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम - लक्ष्मण पर झूठा आरोप - प्रत्यारोप लगाया
वस्तुतः रामायण को हम अपने लेख में व्यक्त कर सकें इतना हममे सामर्थ्य नहीं
माता सीता के पावन चरित्र को व्यक्त कर सके इतना सामर्थ्य नहीं
मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के महान व्यक्तित्व को व्यक्त कर सके इतना सामर्थ्य नहीं
हमारा तात्पर्य यह है की स्त्री ही धर्म का आधार है व् धर्म की प्रतिमूर्ति है
यदि स्त्री धर्मशील हो तो आप हर युद्ध में विजयी होंगे
यदि आपका आचरण धर्मयुक्त हो तो आप सम्माननीय होंगे
यदि आपका भोजन धर्मयुक्त हो तो आपके विचार धर्मयुक्त होंगे
यदि आपका उद्देश्य धर्मस्थापना हो तो आप स्वयं धर्मवीर होंगे
जीवन में विकल्पों का चयन ही आपके जीवन का प्रतिरूप है .......अतः सदैव महानता का चुनाव करें और उस पथ पर अग्रसर रहें
- आकाश आर्यावर्त