Oct 22, 2020
जवानी
खा रहा जब भ्रष्ट-आचरण राष्ट्र की संस्कृति को ,
तब भी जिस युवा पीढ़ी को लाज ना आनी है ,
धू - धू कर जल रही धर्म ध्वजा जब ,
जो युवा शांत है बैठा - ये उसके कायरता की निशानी है ,
जो ना कर पा रही स्वयं के लाज की रक्षा ,
क्या वो मर्दानी है !
लुट रही माँ - बहनों व् धर्म की इज्जत जब ,
तब जो युवा अपना धर्म न निभाए ........
तो फिर उसके तन में बहता खून नहीं वो पानी है ,
जो न कर सके स्त्री और धर्म की रक्षा तो फिर बेकार वो जवानी है ,
जो करे स्व समर्पित राष्ट्र -धर्म को ,
वही सच्चा वीर - अभिमानी है ,
जिस युवा का जीवन हो समर्पित राष्ट्र और धर्म को ,
धन्य वह महान वीर जवानी है
- आकाश आर्यावर्त