Nov 1, 2020
मैं ! ( Poetry on Self Identity )
स्व रक्त स्नान से प्राप्त जीवन का वरदान भी हूँ मैं ,
किन्तु पापियों के लिए काल और अभिशाप भी हूँ मैं ..........
युद्धभूमि का प्रचंड योद्धा भी हूँ मैं ,
परन्तु अंतर्ध्यान और शांत भी हूँ मैं ....
विज्ञान का प्रखर ज्ञान भी हूँ मैं ,
किन्तु गुप्त और उन्मुक्त भी हूँ मैं .....
धर्म का गूढ़ अध्यात्म भी हूँ मैं ,
परन्तु विरक्त और माया से दूर भी हूँ मै .......
साहित्य के श्रेष्ठ उदगम का श्रोत भी हूँ मैं ,
किन्तु प्रदर्शन से दूर भी हूँ मैं .........
अथक गुप्त गुणों का भंडार भी हूँ मैं ,
किन्तु देव सा आत्मस्थिर और नव सृष्टि के सृजन को उन्मुख भी हूँ मैं .........
हाँ ........... !
अनंत- शून्य -आकाश और एक घनघोर रहस्य ही हूँ मैं ........
- आकाश आर्यावर्त
